Bisaldeo Temple Bisalpur Tonk In Hindi |  बीसलदेव मंदिर बीसलपुर टोंक राजस्थान

राजस्थान के बड़े बांधों में शामिल बीसलपुर के गेट संख्या एक के करीब बना प्राचीन बीसलदेव मंदिर रामायण काल से जुड़ा है। कहा जाता है कि रावण ने भगवान शिव को रिझाने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। शिव पूराण में भी इसका उल्लेख है।

बीसलदेव मंदिर राजस्थान के प्रमुख प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जो टोंक जिले के बीसलपुर बांध की किनारे स्थित है। जो भगवान शिव को समर्पित है| इस मंदिर को गोकर्णेश्वर के रूप में भी जाना जाता है| बीसलदेव मंदिर का एक गहरा धार्मिक और सामाजिक महत्व है। महाशिव रात्रि के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं इस मंदिर में दर्शन करने आते है | 

बीसलदेव मंदिर बीसलपुर टोंक राजस्थान

इस मंदिर का निर्माण राजा चहामान के शासक विग्रहराजा VI द्वारा 12 वीं शताब्दी में किया गया था| जिसे बिसल देव के नाम से भी जाना जाता है। बीसलदेव के कारन ही इस मंदिर का नाम बीसलदेव मंदिर रखा गया है  यह मंदिर बनास नदी के बिसलपुर बांध पर स्थित है |

मंदिर का प्रांगण अब के जल में  आंशिक रूप से जलमग्न है 1990 के दशक में बांध के निर्माण से पहले, मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर खड़ा था, जिससे बनास और  डाई नदियो का संगम को देखा जा सकता था यहाँ का वातावरण बहुत शांत और निर्मल होता है | 

अब यह मंदिर भारत के पुरातत्व विभाग के अधीन आता है  पुरातत्व सर्वेक्षण' द्वारा मंदिर को 'राष्ट्रीय महत्व के स्मारक' के रूप में भी माना गया है 

Bisaldeo Mandir Bisalpur Tonk

मंदिर का निर्माण प्राचीन हिंदू शैली की स्थापत्य कला से किया गया था और इसका निर्माण एक पंचरथ के पवित्र स्थान पर किया गया था यहाँ एक चकोर मंडप है जिसमे एक अखाडा और पोर्टिको है जिसे शिखर कहा जाता है। यहाँ पवित्र देवस्थान पर शिव लिंग हैं जो भगवान शिव को समर्पित है यह मंदिर एक अर्धवृताकार गुंबद में बनाया गया है, जो आठ ऊंचे स्तंभों पर समर्थित किया गया है जिसमें घंटियाँ लटकी हुई है और फूलो के डिज़ाइन बने हुए है  सजावट के साथ पुष्प डिजाइन शामिल हैं।


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