रामदेवरा मंदिर राजस्थान | Ramdevra Mandir In Hindi


Ramdevra Mandir In Hindi राजस्थान के जैसलमेर में स्थित रामदेवरा मंदिर राजस्थान का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जहा भारी संख्या में हर साल भक्त रामदेवरा मंदिर आते है। ऐसा माना जाता है कि 1459 ई में इस स्थान पर बाबा रामदेवजी ने समाधि थी। 

जिसके बाद बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने यहां समाधि के चारों ओर मंदिर का निर्माण कराया। यह मंदिर राजस्थान के लोक देवता बाबा रामदेवजी को समर्पित है जिसे बेहद पवित्र माना जाता है।  मंदिर जोधपुर –  जैसलमेर मार्ग पर पोखरण से 12 किलोमीटर दूर स्थित है।

बाबा रामदेव का जन्मदिवस प्रतिवर्ष भक्तों द्वारा सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है। यह तिथि हिन्दू पंचांग के भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दूज पर पड़ती है। 

इस दिन राजस्थान में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है इसी दिन भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष द्वितीया सेे दसमी (अगस्त, सितंबर) तक भव्य मेला लगता है। मेले में रात भर भजन और कीर्तन के साथ बाबा रामदेव को श्रद्धांजलि दी जाती है। इसे "भादवा का मेला" कहते हैं। 

इस मेले में देश भर से लाखों हिन्दू और मुस्लिम श्रद्धालु यात्रा करते हुए पहुंचते हैं तथा बाबा की समाधि पर नमन करते हैं।

रामदेवजी को हिंदुओं द्वारा भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है तथा मुसलमानों द्वारा उन्हें रामशाह पीर के रूप में जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने एक राक्षस को मार दिया था और उन्होंने कई चमत्कार किये थे। तथा उनके पास कई चमत्कारी शक्तियां हैं।

बाबा रामदेव के भक्त राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात में फैले हुए हैं जो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जाति बाधाओं को खत्म करते हैं। बाबा रामदेव जी मंदिर परिसर में मुख्य आकर्षण रामदेव द्वारा निर्मित टैंक है जिसे रामसागर तालाब के नाम से जाना जाता है। 

बाबा रामदेव जी राजपूत थे, जो 14 वीं शताब्दी के अंत में तोमर राजपूत परिवार में पैदा हुए थे। रामदेवजी एक ऐसे संत थे जिन्होंने अपना जीवन को त्याग दिया और मानव जाति की सेवा तथा समाज के दलित लोगों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मात्र 33 वर्ष की आयु में, बाबा रामदेवजी ने समाधि लेकर अपने नश्वर शरीर को त्याग किया था।

यह माना जाता था कि बाबा रामदेव भगवान कृष्ण के अवतार थे और मुस्लिम समुदाय के भी बेहद खास थे। किंवदंती के अनुसार मक्का से पांच पीर रामदेव की शक्तियों का परीक्षण करने आए। रामदेवजी ने उनका स्वागत किया तथा उनसे भोजन करने का आग्रह किया। 

पीरों ने मना करते हुए कहा वे सिर्फ अपने निजी बर्तनों में भोजन करते हैं, जो कि इस समय मक्का में हैं। इस पर रामदेव मुस्कुराए और उनसे कहा कि देखिए आपके बर्तन आ रहे हैं और जब पीरों ने देखा तो उनके बर्तन मक्का से उड़ते हुए आ रहे थे। 

रामदेवजी की क्षमताओं और शक्तियों से संतुष्ट होकर उन्होंने उन्हें प्रणाम किया तथा उन्हें राम शाह पीर का नाम दिया। रामदेव की शक्तियों से प्राभावित होकर पांचों पीरों ने उनके साथ रहने का निश्चय किया। उनकी मज़ारें भी रामदेव की समाधि के निकट स्थित हैं।

Ramdevra Temple Timings In Hindi

भक्त सुबह 4:00 बजे – रात 9:00 बजे तक मंदिर में दर्शन करने के लिए जा सकते हैं।

रामदेवरा मंदिर की यात्रा के लिए सर्दियों का मौसम सबसे अच्छा मौसम है। अक्टूबर – मार्च के महीनों के दौरान रामदेवरा मंदिर यात्रा के लिए आदर्श समय होता है। 


Post a Comment

Previous Post Next Post